विधि का विधान: एक असंभव से जन्मी शक्ति की कहानी

      





लेखक   अध्यापक राकेश कुमार 

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विधि का विधान: एक असंभव से जन्मी शक्ति की कहानी दुनिया के सबसे शक्तिशाली इंसान के जीवन की कहानी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की कहानी जिसकी पैदाइश का भी केवल 1% अवसर नहीं था

यह कोई साधारण कहानी नहीं है। बल्कि विधि के विधान की सच्ची  कहानी है ।।

यह उस व्यक्ति की कहानी है, जिसकी पैदाइश का भी ,केवल 1% अवसर नहीं था,

और जो आज दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों में गिना जाता है। 90 प्रतिशत देश उसके आगे झुकते हैं । अमेरिका भी उसकी  शक्ति  के नजरअंदाज नहीं कर सकता है  । 

एक ऐसा बच्चा जिसके पैदा होने का एक प्रतिशत भी चांस नहीं था।  एक ऐसा  बच्चा 

जिसकी माँ

मौत के ट्रक में डाल दी गई थी।     कहानी को वीडियो में देखने के लिए यहां क्लिक करें

जिसका नाम

इतिहास में लिखे जाने से पहले

खत्म मान लिया गया था।

लेकिन उसी ट्रक में

एक जूते ने किस्मत को पहचान दिला दी।

 यह कहानी स्वयं अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन की पत्नी हिलेरी क्लिंटन ने एक निजी संवाद में साझा की थी—

एक ऐसी कहानी, जिसे सुनकर इंसान का भाग्य, संघर्ष और विधि के विधान पर विश्वास और भी गहरा हो जाता है।

पूरा विश्व युद्ध की चपेट में था ।युद्ध का समय, जब इंसान की कीमत मिट्टी से भी कम थी

समय था सेकंड वर्ल्ड वॉर का।

चारों ओर तबाही, गोलियों की गूंज, बमों की बारिश और इंसानी चीखों से भरी धरती।

रूस का एक सैनिक—

कई महीनों से फ्रंट पर तैनात—

आख़िरकार 7 दिन की छुट्टी लेकर अपने पास के गाँव लौटता है।

उसके मन में सिर्फ एक ही सपना था—

अपनी पत्नी को गले लगाना,

उसकी आँखों में झाँकना,

और कुछ पल के लिए युद्ध को भूल जाना।

लेकिन जैसे ही वह अपने गाँव की सीमा में प्रवेश करता है—

उसके कदम ठिठक जाते हैं।

जहाँ घर थे, वहाँ अब सिर्फ लाशें थीं

चारों ओर बम गिरे थे।

घर मलबे में बदल चुके थे।

गाँव नहीं, मानो श्मशान बन चुका था।

सड़कों पर ट्रक खड़े थे—

जिनमें लाशें भरी जा रही थीं

ताकि उन्हें सामूहिक कब्रों में दफनाया जा रहा था जैसे कोरोना के समय हुआ था  ।

वह सैनिक दौड़ता हुआ अपने घर की ओर जाता है।

लेकिन घर…

घर तो कोई था ही नहीं।

वहाँ सिर्फ एक ट्रक खड़ा था—

और उस ट्रक के भीतर…

लाशों का पहाड़ था 

उसका दिल जोर-जोर से धड़कने लगता है।

वह अपनी पत्नी को पुकारता है—

लेकिन कोई उत्तर नहीं।

एक जूता, जिसने किस्मत बदल दी

तभी उसकी नज़र जाती है—

ट्रक के ऊपर और नीचे दबी एक लाश पर।

उस लाश के पैर नीचे की ओर लटक रहे थे।

और पैरों में पहने जूते…

वह जूते वह पहचान गया।

वह बुदबुदाया—

“ये… ये मेरी पत्नी के जूते हैं।”

उस पल

उस सैनिक के भीतर कुछ टूट गया।

वह ट्रक में मौजूद सैनिकों से हाथ जोड़कर विनती करता है—

“कृपया… इसे सामूहिक दफन में मत भेजिए।

मैं इसे खुद दफनाना चाहता हूँ।”

सैनिक मान जाते हैं।

मौत के बीच जीवन की हल्की सी सांस

जब लाश को बाहर खींचा जाता है—

तभी वह सैनिक कुछ अजीब महसूस करता है।

जैसे…

कहीं कुछ अटका हो।

जैसे…

हल्की सी सांस।

वह घबरा जाता है।

वह अपना कान उसकी छाती से लगाता है।


वह ज़िंदा थी।

मौत के ढेर में दबी—

लेकिन जीवन ने हार नहीं मानी थी।

वह  सैनिक दौड़ कर एक प्रार्थना के साथ  बिना समय गँवाए

अपनी पत्नी को उठाकर

डॉक्टर के पास दौड़ता है।

डॉक्टर भी चकित रह जाते हैं—

“यह चमत्कार है,”

वे कहते हैं।

कई घंटों की मेहनत,

कई दुआओं और कोशिशों के बाद

आख़िरकार उसकी पत्नी को बचा लिया जाता है।

वह औरत

जो मृत्यु के ट्रक में जा चुकी थी—

फिर से जीवन में लौट आती है।

जहाँ उम्मीद खत्म होती है, वहीं से भविष्य शुरू होता है

समय बीतता है।

कई महीने निकल जाते हैं।

और फिर—

वह औरत गर्भवती होती है।

जिस स्त्री को दुनिया ने मृत मान लिया था—

वह अब एक नए जीवन को जन्म देने वाली थी।

और फिर वह दिन आता है…

एक असंभव जन्म

एक बच्चा जन्म लेता है।

ऐसा बच्चा—

जिसके जन्म की संभावना

लगभग शून्य थी।

कहा जाता है कि

उस बच्चे का नाम था— र

👉 व्लादिमीर पुतिन

वही बच्चा

जो आज रूस का राष्ट्रपति बना।

वही व्यक्ति

जो आज दुनिया की

सबसे बड़ी ताकतों में गिना जाता है।

जिसकी एक आवाज़

दुनिया की राजनीति को हिला देती है।

सोचिए… अगर उस सैनिक ने हार मान ली होती

अगर वह सैनिक

जूते न पहचानता—

अगर वह

“अब सब खत्म” मान लेता—

अगर वह

एक लाश को देखने के बाद

हिम्मत हार जाता—

तो शायद इतिहास

कुछ और ही होता।

दोस्तो कहानी पसंद आए तो वीडियो को लाइक करके फोलो करें ।।

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